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जीने की चाह

जीने की चाह
5 Feb 2020 No Comments Article Niraj Pathak

जीने की राह से ज्यादा जरूरी है, जीने की चाह। राह मुश्किल और आसान दोनों तरह के हो सकते हैं, परंतु यदि चाह ही ना हो तो, राह का क्या फायदा। इस समस्त संसार में, प्रायः सभी जीवधारियों का एकमात्र लक्ष्य होता है लौकिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए जीना और परम गति को प्राप्त करना। जहां सभी विभिन्न भौगोलिक एवं जलवायुविक परिवेश में रहते हुए अलग-अलग मार्ग को अपनाकर अपने लक्ष्य अर्थात परम गति की ओर अग्रसर रहते हैं।

बहुत छोटे एवं सरल उदाहरण से इसको स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है मान लिया जाए कि हम में से किसी एक को अपने वर्तमान निवास से राजधानी की ओर प्रस्थान करना है और ऐसा करने के लिए आप किसी न किसी मार्ग और उस साधन अर्थात वाहन का प्रयोग या वाहन मार्ग का प्रयोग करेंगे आपने रेल मार्ग को चुना और अपनी यात्रा प्रारंभ की मध्य मार्ग तक आते-आते आगे का मार्ग ज्ञात अज्ञात कारणवश अवरुद्ध होने की स्थिति में आपने मार्ग बदलकर अपने गंतव्य तक पहुंचने का निश्चय किया, यही बात जीवन के इस निरंतर क्रम में भी लागू होती है यदि आप में चाह ना हो तो आप उसी रेल मार्ग पर अवरोध के हटने तक का इंतजार करने को विवश होंगे।

मार्ग सदैव होते हैं बस आप में यह चाह होनी चाहिए, साथ ही यह समझ भी कि आप उपयुक्त मार्ग का चयन कर सके अपने गंतव्य को प्राप्त करने को।

About The Author
Niraj Pathak IT-Professional, Motivational Speaker, Writer, Ward-Councillor at Municipal Council of Phusro.
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