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राष्ट्र गाथा

राष्ट्र गाथा
25 Jun 2019 No Comments Poem Niraj Pathak

राष्ट्रगाथा

क्रांति रक्त से रंजित हो,
जब धरा हुई थी लाल।
उस मृदा से हर पौरूष का,
अब शोभित है कपाल।01।

राष्ट्र गाथा रची इन्होंने,
देकर जीवन दान।
क्रांति रक्त से सींचा सबने
सर्वधर्म प्राप्त सम्मान।02।

राष्ट्र पौरुष की गाथा को,
जो सकल विश्व दोहराता हो।
गर्व करें ऐसे भारत पर,
जो विश्व गुरु कहलाता हो।03।

जिसने गाथा पूरित की,
स्वयं बनकर पूर्ण विराम।
स्वीकारो हे पूजित मेरे,
केसरिया प्रणाम।04।

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About The Author
Niraj Pathak IT-Professional, Motivational Speaker, Writer, Ward-Councillor at Municipal Council of Phusro.
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