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अन्य आय बनाम अन्याय – “समृद्ध झारखंड” में प्रकाशित आलेख 04

अन्य आय बनाम अन्याय – “समृद्ध झारखंड” में प्रकाशित आलेख 04
16 Sep 2019 No Comments Article Niraj Pathak

रांची, झारखंड से प्रकाशित होने वाली विख्यात पत्रिका “समृद्ध झारखंड” में प्रकाशित मेरे कुछ आलेख। पूरी टीम को बधाई ।

अन्य आय बनाम अन्याय

यदि आप उन सभी सामान्य उपायों को न अपनाकर जो किसी कार्य को निष्पादित करने के लिए नितांत आवश्यक हैं किसी दूसरे ऐसे उपाय को अपनाते हैं जिससे किसी का हित प्रभावित होता हो, तो, आप या तो रिश्वत लेने वालों में अथवा देने वालों में माने जायेंगे.

यूं तो अन्य आय के स्रोत होना आज के जीवन में बहुत ही आम बात है, परन्तु  यह कि, आय के स्रोत कौन से हैं अथवा किस प्रकार के हैं, महत्वपूर्ण है. आपके किसी मुख्य आय के स्रोत, जिसे आप मानते हों, जिसके लिए आप सर्वाधिक समय व्यय करते हैं, के अतिरिक्त उसी स्रोत से समय का आहरण कर किसी अन्य आय के स्रोत में समय का निवेश भी अन्याय की श्रेणी में आ जाता है.

आपके अन्य आय का स्रोत अन्याय है अथवा नहीं यह पूरी तरह आपके उस स्रोत पर किये गए समय एवं धन अथवा परिश्रम अथवा तीनों के निवेश के समीकरण पर निर्भर करता है.

जब आप किसी स्रोत से आय कर रहे हैं तब आप उसी समय अन्याय भी कर रहे होते हैं. जैसे कि आप किसी काम में लगे हैं जो आपकी आय का मुख्य स्रोत है और आप बिना भूख-प्यास का ध्यान किये बस काम पूरा हो जाय लगे रहते हैं तब आप अपने शरीर के साथ अन्याय कर रहे होते हैं, जब आप व्यापार में किसी वस्तु पर छूट देते हैं तो वह भी अन्याय होता है उन कम लिए पैसों का जिससे कि आप व्यापर में कुछ और कर सकते थे पर आपने दान में दे दिया.

बात, बिना अन्याय के अन्य आय अर्जित करने से सम्बंधित है. इसके लिए अपनी नियुक्ति के अंतर्गत उन सभी कार्यविधियों और कार्यावधियों को सम्मिलित किया जाता है जिसके निर्वहन में जब आप किसी विशेष कार्य पर अपना सर्वाधिक समय देते हैं और उसका लाभ नियोक्ता को प्राप्त नहीं होता, अन्याय हो जाता है.

जब आप, आपके लिए सुनिश्चित किये गए कार्यों को अनुरूपता से पूरा करते है, सब सही जा रहा होता है, परन्तु जैसे ही किसी कार्य के निष्पादन हेतु अतिरिक्त आय की मांग करते हैं, बावजूद इसके कि उक्त कार्य के लिए आपको भुगतान किया जाता है, यह आपको अन्याय की श्रेणी में खड़ा कर देता है.

अन्य आय को अन्याय की श्रेणी से पृथक रखने के लिए आपको उसमे किये जाने वाले समय, धन अथवा जोखिम के निवेश को अलग रखना पड़ता है. जब आप ऐसा कर पाते हैं तब आपकी अन्य आय अन्याय नहीं होती.

एक सुनिश्चित कार्य की दैनिक अवधि के पूरे होने पर जब आप अतिरिक्त समय में अपने समय और परिश्रम का निवेश करते हैं तब उससे प्राप्त आय मात्र अन्य आय ही होती है अन्याय नहीं.

अतएव, अन्य आय अर्जित करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखें कि किसी भी स्तर पर अन्याय न हो रहा हो, तभी वह अन्य आय सही होगा. एक आय से दूसरे आय की दूरी जितनी कम होगी अन्याय की संभावना उतनी ही प्रबल होगी, अतः अन्य आय को अपने मूल आय के स्रोत से कदापि सम्बंधित न होने दें, जिससे कि आपके दोनों ही स्रोत बने रहें और आप अन्य आय भी करते रहें साथ ही अन्याय से दूर भी रह सकें.

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Niraj Pathak IT-Professional, Motivational Speaker, Writer, Ward-Councillor at Municipal Council of Phusro.
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